मकड़िया

तीसरे प्रकार की जो किट है वह सही मायने में किट नहीं है। मेंढक के छह पैर होते हैं लेकिन आठ होते हैं। आम भाषा में 3 कोड कहा जाता है। लाल और पीले मकड़िया पत्ते के नीचे जाल बुनकर अंडे निकलते हैं अंडों से निकलने या चूजने लगती है। पत्ते का रसचूसकर यह अर्भक या निम्फ बनता है जो आगे चलकर जाल बुनने वाले मकड़ी बनता है। मकड़ी अपने धागों से लटककर हवा के साथ फैलती है। मिलन के बाद आपस में जुड़कर जाल बुनना उन्हें अंदर देता है। चमक नहीं दिख रही है। उनमें गर्मी अधिक होती है। नतीजा मे अक्सर यह एक अंत से घुसते है और हवा के रुख नुसार एक अंत से दूसरे अंत के और फैलते है। जब इनकी संख्या कम होती है तब पानी के रहस्य से होने से भी ये अतीत हो सकते हैं। लेकिन एक बार फैल गए तो कुछ नियंत्रण केवल चुनिंदा दवाएं ही काम करती हैं। यह क्लिक कर आप इन औषधियों के बारे में जान सकते हैं।

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