Seeds of Change: How the New Draft Seeds Bill 2025 Decides the Future of Your Farm

बदलाव के बीज: नया 'सीड्स बिल 2025' आपके खेत का भविष्य कैसे तय करेगा?

इस मंजर की कल्पना करें: आप बाजार से महंगा हाइब्रिड बीज खरीदते हैं, महीनों तक कड़ी धूप में मेहनत करते हैं, मिट्टी में खाद डालते हैं और फसल को पानी देते हैं—लेकिन अंत में पाते हैं कि आधे बीज तो अंकुरित ही नहीं हुए, या फसल कटाई से पहले ही खराब हो गई। जब आप डीलर से शिकायत करते हैं, तो वह कंधे उचका देता है और कहता है, "मैं क्या कर सकता हूँ?"

दशकों से भारतीय किसान 1966 में बने एक कानून के भरोसे यह लड़ाई लड़ रहे थे, जो उस समय बना था जब खेती पूरी तरह से अलग थी। लेकिन 13 नवंबर 2025 को सरकार ने 'ड्राफ्ट सीड्स बिल 2025' (Draft Seeds Bill 2025) जारी किया है। यह कानून खेल बदलने का वादा करता है।

यहाँ जानिए कि हर किसान को इस नए कानून के बारे में क्या जानना चाहिए, यह विवादों से क्यों पैदा हुआ, और आपकी अगली फसल के लिए इसका क्या मतलब है।

अभी क्यों? वे घटनाएं जिन्होंने इस कानून को जन्म दिया

आप पूछ सकते हैं, "अगर पुराना कानून 60 साल तक चला, तो अब इसे बदलने की क्या जरूरत है?" इसका जवाब भारतीय कृषि में आए बड़े बदलावों—और बड़ी त्रासदियों—में छिपा है।

पेप्सिको आलू कांड (2019): 

आपको याद होगा जब बड़ी कंपनी 'पेप्सिको' ने गुजरात के गरीब आलू किसानों पर करोड़ों रुपये का मुकदमा ठोक दिया था? उनका दावा था कि किसान अवैध रूप से उस खास किस्म का आलू उगा रहे थे जिसका इस्तेमाल 'लेज़' (Lays) चिप्स बनाने में होता है। इसने किसानों के अधिकारों को लेकर भारी हंगामा खड़ा कर दिया। नया बिल यह स्पष्ट करने की कोशिश करता है कि किसान बीजों के साथ क्या कर सकता है और क्या नहीं, ताकि भविष्य में ऐसी कानूनी दादागिरी से बचा जा सके।

गुलाबी सुंडी और नकली बीटी कॉटन:

महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों में, किसानों ने बीटी कॉटन बीजों के लिए भारी कीमत चुकाई, जिन्हें कीड़ों से लड़ना था। लेकिन जब फसलें बर्बाद हुईं, तो कंपनियों को नुकसान की भरपाई के लिए मजबूर करने वाला कोई कड़ा कानून नहीं था। खराब बीज बेचने पर पुराना जुर्माना मजाक जैसा था—अक्सर बस कुछ सौ रुपये।

नकली बीज माफिया: 

हर सीजन में, "नकली बीजों" के हजारों पैकेट बाजार में आ जाते हैं। डिजिटल ट्रैकिंग के बिना, इन अपराधियों को पकड़ना असंभव था।

अच्छी खबर: आपके लिए क्या बदल रहा है?

नया बिल काफी सख्त है। इसका उद्देश्य बाजार की सफाई करना है। आम किसान के लिए इसमें सबसे बड़ी जीत ये हैं:

'क्यूआर कोड' (QR Code) की क्रांति

अब कोई अनुमान नहीं लगाना पड़ेगा। बेचे जाने वाले हर बीज पैकेट पर अब संभवतः एक क्यूआर कोड होगा। आप इसे अपने स्मार्टफोन से स्कैन करके यह पता लगा सकते हैं कि बीज वास्तव में कहाँ से आया है, इसके "माता-पिता" (Parent seeds) कौन हैं, और क्या यह गुणवत्ता परीक्षण में पास हुआ है। यह सोने पर हॉलमार्क जैसा है, लेकिन बीजों के लिए।

₹500 से सीधे ₹30 लाख तक जुर्माना

पुराने 1966 के कानून के तहत, अगर कोई कंपनी आपको नकली बीज बेचती थी, तो जुर्माना बहुत कम था। 2025 के बिल के तहत, स्पूरियस (नकली) बीज बेचना एक बड़ा अपराध है। 

सजा क्या है?

30 लाख रुपये तक का जुर्माना। 3 साल तक की जेल। सजा में यह भारी बढ़ोतरी बीज डीलरों को किसान को धोखा देने से पहले दस बार सोचने पर मजबूर करेगी।

मुआवजा (Compensation) अब आपका अधिकार है

पहले, अगर बीज फेल हो जाता था, तो आपको 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम' (Consumer Protection Act) के भरोसे रहना पड़ता था, जो एक लंबी और महंगी अदालती लड़ाई है। नए बिल में प्रावधान है कि यदि कोई पंजीकृत (Registered) बीज वादे के मुताबिक प्रदर्शन करने में विफल रहता है, तो आप निर्माता से मुआवजे का दावा कर सकते हैं।

बीज बचाने का आपका अधिकार सुरक्षित

एक डर था कि कंपनियां किसानों को बीज दोबारा इस्तेमाल करने से रोक देंगी। बिल ने यह स्पष्ट किया है: आप अपने खेत के बीजों को बचा सकते हैं, बो सकते हैं, दोबारा बो सकते हैं, अदला-बदली कर सकते हैं और बेच भी सकते हैं।

पेंच (The Catch)

आप उन्हें ब्रांड नाम के तहत नहीं बेच सकते। यदि आप अपने पड़ोसी को खुले बीज बेचते हैं, तो यह ठीक है। लेकिन यदि आप उन्हें पैक करते हैं और उस पर कोई फैंसी लोगो या ब्रांड लगाते हैं, तो आपको लाइसेंस की आवश्यकता होगी।

विवाद: आपको किस बात की चिंता होनी चाहिए?

हर कोई खुश नहीं है। किसान यूनियनों और कार्यकर्ताओं ने कुछ खतरे के निशान उठाए हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए।

'टर्मिनेटर' तकनीक पर चुप्पी

 इस बिल के 2004 के संस्करण में, सरकार ने स्पष्ट रूप से "टर्मिनेटर टेक्नोलॉजी" पर प्रतिबंध लगा दिया था—ये ऐसे बीज हैं जो जेनेटिक रूप से ऐसे बनाए जाते हैं कि वे बांझ होते हैं (वे दूसरी पीढ़ी में नहीं उगते)। इससे किसान हर साल नया बीज खरीदने को मजबूर हो जाते हैं।

चिंता: 2025 का बिल इस मुद्दे पर चुप (Silent) है। आलोचकों को डर है कि यह खामी कंपनियों को ऐसे बीज बेचने की अनुमति दे सकती है जो आपको उनका स्थायी ग्राहक बना देंगे, जिससे बीज बचाने की सदियों पुरानी प्रथा नष्ट हो जाएगी।

'देसी' बीजों पर खतरा

नए बिल में अनिवार्य है कि बेची जाने वाली सभी किस्मों (Varieties) को पंजीकृत (Registered) होना चाहिए।

चिंता: बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां अपने हाइब्रिड बीजों को रजिस्टर कराने के लिए कागजी कार्रवाई और फीस आसानी से संभाल सकती हैं। लेकिन छोटे सामुदायिक बीज बैंकों या दुर्लभ देसी किस्मों का क्या होगा? यदि वे पंजीकरण का खर्च नहीं उठा सकते, तो वे पारंपरिक बीज बाजार से गायब हो सकते हैं और उनकी जगह पूरी तरह से कॉरपोरेट बीज ले लेंगे।

'अदालत' का जाल

हालांकि बिल मुआवजे का वादा करता है, लेकिन यह आपको तुरंत पैसा नहीं देता। आलोचकों का तर्क है कि इस प्रक्रिया में अभी भी आपको एक समिति या अदालत के सामने यह साबित करना पड़ सकता है कि बीज खराब था। महंगे वकीलों वाली एक विशाल कंपनी के सामने, क्या छोटा किसान वास्तव में जीत पाएगा?

निष्कर्ष: किसान के लिए फैसला

'सीड्स बिल 2025' (Draft Seeds Bill 2025) एक दोधारी तलवार है।

एक तरफ: यह बहुत जरूरी पुलिसिंग लाता है। यह एक सख्त "इंस्पेक्टर" की तरह काम करता है जो नकली बीज माफिया को डराता है और खराब गुणवत्ता पर भारी कीमत वसूलता है।

दूसरी तरफ: यह बड़ी निजी कंपनियों और संभवतः विदेशी बीजों के लिए दरवाजा चौड़ा करता है, जो लंबे समय में हमारी स्थानीय बीज स्वतंत्रता के लिए खतरा बन सकता है।

आपको क्या करना चाहिए? सतर्क रहें। बिल फिलहाल "ड्राफ्ट" (मसौदा) चरण में है। यही वह समय है जब सरकार सुनती है। अपनी ग्राम सभाओं और किसान समूहों में इस पर चर्चा करें। बीज खेती की आत्मा है—यह सुनिश्चित करें कि इसकी रक्षा करने वाला कानून आपके पक्ष में हो।

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