कैसे भिंडी मेविजवाले सुंडीयों से (छेदक) सैट?
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भिन्डी एक लोकप्रिय फल सब्जी और अत्यंत लाभकारी फसल है. छोटे बड़े शहरोंमें इसकी मांग सालभर रहेती है. इसमें किटोंका प्रकोप अक्सर कम ही होता है. लेकिन, कपास की नजदीकी रिश्तेदार फसल होनेसे, इसमें आने वाली सुंडियोपर नियंत्रण करना मुश्किल होता है. इनपर दवाओंका असर अक्सर कम होता है.
एकबार सुंडीका प्रकोप फसल में हो गया तो खर्चा और मेहनत, चार पाच गुना बढती है. लेकिन सुंडीयों पर पूरा नियंत्रण नही हो पाता. उपज कम होने से आमदनी भी घटती है.
भिन्डी, कपास, सोयबीन, मकई, अरहर और चने जैसी फसलोंमें आनेवाली,यह सुंडीया किसी पनौती से कम नही. आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाला सिन बन जाता है.
इस लेख के माध्यम से आपको इन सुंडीयोंको निपटने के ऐसे तरीकोंसे अवगत करने की कोशिश होगी जिससे...
- आपके फसल में सुंडियो का प्रकोप ना के बराबर होगा
- मेहनत कम होगी और इसका फायदा भी होगा
- छिडकाव का खर्चा कम होने से फसल की लागत कम होगी
- फसल शानदार होने से उत्पादकता बढ़ेगी और आमदनी भी बढ़ेगी
इस लेख में दियी गयी जानकारी आप भिन्डी के अलावा कपास, सोयाबीन, मक्की, अरहर/तुअर, और चने जैसी फसलोंमें भी कर पाएँगे. तो ये सारी फसले आपको भरपूर मुनाफा देगी.
भिन्डीमें पायी जानेवाली फलछेदक सुंडीया

इनके प्रभावी नियंत्रण हेतु इनके जीवनचक्र को समझना बहोत जरूरी है. इन सुंडीयोंका जीवनचक्र चार स्टेजेससे गुजरता है. सुंडी वाली स्टेज सबसे नुकसानदेह होती है. इस अवस्था में, वह फसल के फल, तने और पत्तों को खाती है. फल और तने अंदरसे खोकला करती है.
इस स्टेज के बाद में वो मिटटी में शंखी या कुकुन बनाती है. यह निश्चल अवस्था होती है. शंखी एक ऐसी अवस्था है जिसपर काबू करना किसानोंके हाथ में नही होता, क्योंकि हो सकता है ये किसी और खेत में या जंगल में हो. वातावरण के अनुसार कुछही दिनोंमें इन शंखीयोंसे पतंग/मोथ निकल आते है. इससे निकलने वाले पतंग उड़ते है और उड़ते हुए वो एक रात में कई मैल अंतर पार कर लेते है. पतंग अवस्था में छिडकाव का कोई असर नही होता क्यों की छिडकाव के बाद बाहर से नये पतंग फसल में आ सकते है.
ये पतंगे नर या मादा होते है. उड़ने वाले पतंगों को साथी की तलाश होती है. मादा एक गंध (फेरोमोंन) छोडती है. हर प्रजाति का गंध अलग होता है. इस गंध से आकर्षित हो कर नर मादा को ढूंड लेता है. अगर इस मिलन को रोका गया तो इसके बाद आने वाली अंडोवाली स्टेज नही आएगी या इतनी कम हो जाएगी की फसल पर असर नही होगा.
अगर भी यह सफल नही हुआ तो भी अगर इस स्टेज में पतंग पकड़े गये तो अन्डोको मारने वाली दवा छिडककर नियंत्रण में मदत मिल सकती है. पतंगे फसल पर सीधा असर नही करती. लेकिन यह सबसे खतरनाक अवस्था है, क्योंकी इस अवस्था में नर-मादा का मिलन होता है. मिलन के बाद मादा फसल के अलग अलग हिस्सोंपर अंडे देती है. एक मादा २०० से ३०० अंडे देती है, जिससे इनके अगले पीढ़ी की संख्या अचानक ही सौ से दोसो गुना बढ़ती है. यह एक विस्फोट जैसे स्थिती है. अंडोसे छोटीछोटी सुंडीया निकलती है. यह सुंडीया भूकी होती है और फसल को सबसे ज्यादा क्षति पहुचाती है.
फेरोमोंन ट्रैप इस्तेमाल करने के दो लक्ष्य होते है. पहेला ये के, क्या आपके खेतोंमें सुंडी के पतंग उपस्थति है? और दुसरा ये के, क्या इनको पकडकर मादा के मिलनसे रोका जा सकता है?
कुछ प्रजातियों के लिए जो फेरोमोंन ट्रैप उपलब्ध है वो सिर्फ उपस्थिति की जानकारी दे सकते है. इनमे क्षेत्र में उपस्थित सारे नरोंको आकर्षित करने की क्षमता नही होती. ऐसे ट्रैप सिर्फ एकड़ इंडिकेटर होते है.
कुच्छ प्रजातियोंके फेरोमोंन ट्रैप, इतने प्रभावी होते है के क्षेत्र के सारे नरों को आकर्षित कर लेते है. मादाओंको मिलन के लिए नर उपलब्ध नहीं होते. वो अंडे दे नही सकती. इन्हें मास ट्रैपिंग फेरोमोंन कहा जाता है. इनके प्रति एकड़ १० से १२ ट्रैप लगानेसे फसल की पूरी सुरक्षा हो जाती है.
फेरोमोंन ट्रैप की उपलब्धता
हेलीकोव्हर्पा सुंडी: ये मास ट्रैपिंग कर सकते है. ऑनलाइन खरीदने हेतु यहा क्लिक करे
छीटेदार सुंडी: इंडिकेटर ट्रैप.
गुलाबी सुंडी: ये मास ट्रैपिंग कर सकते है. ऑनलाइन खरीदने हेतु यहा क्लिक करे
बिट आर्मीवर्म सुंडी: इंडिकेटर ट्रैप.
फेरोमोंन ट्रैप की एक ही समस्या है. ये ट्रैप सिर्फ किसी एक प्रजाति के लिए ही असरदार होते है. तो अगर भिन्डी में चार प्रकार की सुंडिया आती है, तो आपको चारों प्रजाति के १०-१२ ट्रैप लगवाने होगे. लेकिन इसकी भी एक तोड़ है.
फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल करते समय हमे इन्क्रीमेंटल तरीकेसे कार्यरत होंना होंगा. उपलब्ध प्रजाती के दो दो ट्रैप लगाकर, हर दूसरे-तिरसे दिन अटके हुए पतंग चेक करे। अगर पतंगों की संख्या बढ़ रही तो आप या तो ट्रैप की संख्या बढ़ाए या तो जैविक छिड़काव का प्रयोग करे।
जैविक छिड़काव मे बेसिलस थुरिन्जेंसिस (जीवाणु), बवेरिया बेसीआना (फफूंद) और अझाडीरेकटींन (नीम का तेल विरहित अर्क) का इस्तेमाल कर सकते है। मान्यता प्राप्त जैविक उत्पादनों का ही प्रयोग करे।
जैविक छिड़काव की उपलब्धता
बेसिलस थुरिन्जेंसिस: ऑनलाइन उपलब्ध है
बवेरिया बेसीआना: ऑनलाइन उपलब्ध है
अझाडीरेक्टीन:ऑनलाइन उपलब्ध है
जबतक आपके खेतों मे सूँडीया के प्रकोप का असर नहीं दिखाई दे रहा है, तबतक आप फेरोमोंन ट्रैप और जैविक छिड़काव से काम चला सकते है। लेकिन अगर प्रकोप का असर दिखाई दे रहा है तो आपको केमिकल छिकड़ाव करना ही होगा। ऐसा करते हुए आपको दवाई का चुनाव ठीकसे करना होगा। नए तकनीक पर आधारित दवाओकाचुनाव करे। धनुका, बायो स्टेड , एच पी एम, यु पी एल, क्रिस्टल, नेशनल, सुमीटोमो, अदामा, अतुल जैसी नामी कंपनीयोकी दवाईया बिल के साथ खरीदे। टूटे हुए सील की पैकिंगका स्वीकार ना करे।
सुमीप्रेम्प्ट : सुमीटोमो कंपनी की इस दवा मे दो सक्रिय घटक एक साथ है। यह एक आंतरप्रवाही दवा होने से छिकड़ाव के तुरंत बाद फसल के हर हिस्से मे फैल जाती है।
कोस्को: पी आय इंडस्ट्री की इस दवा मे क्लोरानट्रानीप्रोल यह सक्रिय घटक है।
कव्हर: धनुका की इस दवा मे क्लोरानट्रानीप्रोल यह सक्रिय घटक है।
इमामेक्टीन बेनझोएट 5% एस जी यह सक्रिय घटक अनेक ब्रांडसमे उपलब्ध है।
किसी भी किट को निपटने हेतु उनके जीवन चक्र को समझना जरूरी होता है। इस लेख के माध्यम से आप भिंडी मे आनेवाली सूँडीयोके जीवनचक्र को समझ पाए होंगे, ऐसी आशा करता हु। आपको सवाल पूछना हो तो कमेन्ट मे लिखे। हमारे फ़ेसबुक पेज को फॉलो करे और टेलेग्राम को भी जॉइन करे।
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