प्याज में लगने वाले फफूंद जनित रोग और उनका उपाय.  Onion diseases and selection of fungicides

प्याज में आनेवाले फफूंदीजनित रोगों की पहचान और इलाज

किसान भाइयोंका रिसेट एग्री आपका स्वागत करता है. प्याज एक ऐसी फसल है जिसे सालभर डिमांड होती है. और  सालभर इसकी उपज हो सकती है.

इस फसल से मुनाफा कमाने हेतु आपको कुछ बातोंका ध्यान रखना होगा

  • हर मौसममें उपज ले ताकि रेट कम ज्यादा होने पर, एव्हरेज रेट अच्छी मिलेगी
  • मार्किट रेट से मुनाफ न हो तो उपज को हवादार तरीकेसे स्टोअर करे. इस दरम्यान छटाई कर बाविस्टिन पावडर लगाए
  • उपज से  बीजोत्पादन के लिए लगने वाले कंद (४०-५० ग्राम के गोल प्याज) अलग से रखे 
  • खुदका बीजोत्पादन अवश्य करे, बचे कंद आप अन्य किसानों को बेच सकते है
  • खुदके बीजोंका उपयोग करे. बाकी बिज अन्य किसानों को बेचे 
  • आवश्यकता से अधिक बिजोंकि बुवाई कर, आपके आवश्यकता के अधिक पौधे अन्य किसानोंको बेचे
  • प्लानिंग से दुगने क्षेत्र पर रोपाई कर, आधे क्षेत्र कि फसल हरी पत्ती स्वरूप सब्जी मंडी मे बेचे
  • रोपाई करते समय एक एकड मे कमसे कम ३ लाख पौधे अवश्य रोपे
  • इस तरीकेसे मुनाफा कमाने के अधिक अवसर खोजे
  • मेहनत करे, खर्चे बचत करे लेकीन खर्चे से बचे नही.
  • उर्वरक, फफुंदनाशी और कीटनाशियो कों प्रमाण बद्ध उपयोग करे
  • महंगे पीजीआर और प्लांट टोनिक के खर्चे को लगाम लगाए
  • प्याज मे मल्चिंग के इस्तेमाल से खरपतवार  

इस फसल को नमी की जरूरत होती है लेकिन थोड़ी अधिक हमी हो तो खासा नुकसान हो सकता है. फफूंद जनित रोग इस फसल में ६० प्रतिशत तक नुकसान कर सकते है. 

इस लेख में आपसे प्याज में दिखाई देनेवाले फफूंदजनित रोग और उनका इलाज साँझा कर रहे है. इसे अपने डायरी में अवश्य नोट करे ताकि उचित दवा का इस्तेमाल हो सके. ध्यान रहे बाजार में नकली, बनावटी, मिलावटी दवाए धडल्ले से बेचीं जा रही है. आप सावधान रहे.    

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विगलन: इसे बेसल रॉट (Basal Rot) भी कहा जाता है. पत्तिया और बिज डंठल पीले होते है और सुख जाते है. इस कारण से प्याज का कंद छोटा रहे जाता है. अगर आप बिज उत्पादित कर रहे है तो अम्बेल का आकार छोटा रहता है. कंद के निचले हिस्से में सडन देखि जा सकती है और जड़े भी गुलाबी रंग की दिखाई देती है. साफ़/कोम्बीसेफ/ इडीशन/ रिव्हाइव  (Carbendazim  25% + Mancozeb 50% WS) १ ग्राम प्रति लिटर के औसत से छिड़के और ड्रेंचींग करे.

सफेद गलन (White rot): मिटटी के पास प्याज का उपरी हिस्सा गल जाता है और वहा सफेद एव भूरी फफूंद के दाने दिखने लगते है. पौधा मुरझाता है और सुख जाता है. कंद पूरी तरह फफूंद से ढक जाता है और पूरी तरह सड जाता है. बीजों की फसल में अम्बेल बनते ही नही हिया. मिटटी तैयार करते वक्त हल्की नमी बनाकर जुताई करने से रोगकारक फफूंद मारे जाते है. ट्रायकोडर्मा को मिलाने से फायदा होता हिया. पौधों को लगाते समय उनको १ ग्राम प्रति लिटर  साफ़/कोम्बीसेफ/ इडीशन/ रिव्हाइव   (Carbendazim  25% + Mancozeb 50% WS) के घोल में भिगोकर लगाए. तथा इसी का ड्रेंचींग करे.

बैंगनी धब्बा (purple blotch): इस रोग की फफूंद मिट्टी तथा बिज के माध्यम से फैलता है. फसल के पत्तिया तथा डंठल पर सफेद भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते है जिनका मध्य भाग बेंगनी रंग का होता है. बरसात में यह रोग अधिक असर दिखता है. लक्षण दिखाई दे तो निम्न प्रयोग करे.

  • स्कोअर (Difenoconazole 25% EC) १ मिली प्रति लिटर
  • एमीस्टार (Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% w/w SC १ मिली प्रति लिटर
  • कस्टोडीया (Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3% w/w SC१ मिली प्रति लिटर
  • विस्मा (Boscalid 25.2% +Pyraclostrobin 12.8% WG)  १ मिली प्रति लिटर
  • क्लच/केब्रीओ टॉप  (Metiram 55% + Pyraclostrobin 5% WG) १ मिली प्रति लिटर 

झुलसा (Blight): प्याज में ३ से ४ प्रकार से झुलसा होता है. पत्तिया हरी दिखाई देती है लेकिन फफूंद पत्ती के भीतरी सतहमें फैलती है. कभी पत्तियाँ स्प्रिंग की तरह मुडती है तो कभी राख जैसे धब्बे आते है जो फैलकर पत्तिको झुलसा देते है.  

आसिता: प्याज में मृदुरोमिल असिता (Downey mildew) और चूर्णिल असिता (Powdery Mildew), दोनों रोग दिखाई देते है. हवा में नमी होने से पत्तियों पर छोटे सफेद रंग के धब्बे और हल्के भूरे रंग के कवक तंतु देखे जा सकते है. इसे मृदुरोमिल असिता कहा जाता है. पत्तियों पर सफेद रंग के फफूंद के बीजाणु , चूर्ण पाउडर की तरह दिखाई देते है जिसे चूर्णिल असिता कहा जाता है.

मृदुरोमिल असिता के नियंत्रण हेतु
चूर्णिल असिता के नियंत्रण हेतु
  • थायोन्यूट्रि ०.२ प्रतिशत से छिडकाव करे
  • डीनोकैप १ मिली प्रति लिटर से छिडकाव करे

आशा करते है, यह जानकारी आपको उपयोगी सिद्ध होगी. कोई सुझाव/शिकायत हो तो कमेन्ट करे. लेख शेअर करे.

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