प्याज की फसलसे किसान का नुकसान क्यों होता है?
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रिसेट एग्री के विशेष लेख में आपका स्वागत है. भारतीय किसानों के लिए बेहतर मुनाफा, खुशहाल जिन्दगी, यह हमारा नारा है. इसीलिए लेखो की रचना, कृषि की लागत कम करते हुए मुनाफा बढ़ाने के हिसाब से कियी जाती है. आपको हमारा यह प्रयास पसंद आएगा ऐसी आशा करते है. इस वेबसाइट के मेनू में जाकर आप हमारे अन्य ब्लॉग पढ़ सकते है!
दुनियाभर के व्यजनों के स्वाद में "प्याज" चारचाँद लगता है. यह पोषक (nutritious) होने के साथ साथ ढेर सारे स्वास्थ्य लाभ (health benefits) भी देता है. प्याज में बड़ी मात्रा में व्हिटामीन सी, बी सिक्स, फोलेट और पोटाश जैसे मिनरल होते है. ढेर सारे व्यंजन, सूप और सलाद प्याज के तेज (pungent) स्वाद के बिना अधूरे होते है. इसे कच्चा तो खाया ही जाता है लेकिंग इसे भूनकर, तलकर, पकाकर और नमकिन बनाकर भी इसके स्वाद उभरकर आते है. ये शारीरिक दाह को कम करते हुए कर्करोग की रोकथाम (anticancer) करता है. हृदय रोग (heart disease) के लिए फायदेमंद होने के साथ साथ यह रोग प्रतिकार क्षमता को भी बढाता है. कोई अन्य उपज, शायद ही प्याज के महत्व का मुकाबला, कर पाए! इसलिए बाजार में इसकी मांग, हमेशा होती है!
ऐसा होते हुए भी थोड़े ही किसान प्याज के फसल में मुनाफा बना पाते है. अधिकतर किसानों का, प्याज की फसल लेनेसे, आर्थिक नुकसांन ही होता है. इस लेख के माध्यम से हमे ऐसेही मुद्दों का जायजा लेना है जो किसान के आर्थिक नुकसान (financial loss) का कारण बनते है.
सबसे पहले हमे यह समझना है के आर्थिक नुकसान क्या है और इससे कैसे बचना है.
जब किसी भी फसल के उपज को बेचकर जमा होने वाली रक्कम, लागत में आए खर्चे, मेहनत और वक्त के मुकाबले कम होती है, तो उसे नुकसान माना जाता है.
फसल की लागत (cost of crop): इसमें फसल के बिज, उर्वरक, मेहनत, औजार, पानी, कीटनाशक जैसे खर्चो का समावेश होता है. इसका गणित करते वक्त किसान को बचत करने के औसरोका पता करना होगा. लेकिन ऐसी किसीभी बचत से बचना होगा, जिसके कारण फसल की उपज घटने का अंदेशा हो. ऐसे खर्चो को शामिल करना होगा जो फसल को अधिकतर खतरों से होने वाले नुकसान से बचाए. ऐसे अवसरों को खोजना होगा जो वक्त से पहले लागत के खर्च कम कर पाए.
उपज (Yield of crop): उत्पादित फसल की कुलमात्रा को उपज कहते है. कुछ फसलो से एक से अधिक उत्पादन प्राप्त हो सकते है. अवसर ढूंढने से उत्पादनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है. कभी कभी उपज पर प्रक्रिया करते हुए उसका मुल्युवर्धन किया जा सकता है.
विक्री मूल्य (Market rate): उत्पादन को किस दर से बेचा जाता है, उसे विक्री मूल्य कहते है. अगर किसी एक फसल से, एक से अधिक उत्पादन मिलते है, तो उन्हें इसमें जोड़ना होगा. फसल से प्राप्त उपज, और उपजके मुल्युवर्धित स्वरूपों को अलग अलग वक्त और अलग अलग मार्केट में बेचकर विक्री मुल्यु बढाया जा सकता है.
प्याज में आर्थिक नुकसान के कारण क्या है और उन्हें कम करते हुए मुनाफा कमाने के क्या मौके है?
प्याज के फसल में नुकसान के अनेक कारण है, जिसमे निम्न कारणों का समवेश होता है.- बदलता मौसम (climate change)
- सुखा (draught)
- मिटटी की घटती उर्वरकता (loss of soil fertility)
- खरपतवार (weeds)
- फफूंद जनित रोग जैसे विगलन, बैंगनी धब्बा रोग (purple blotch), जलेबी रोग (twister/spring disease), सफेद सडन
- किटोंका प्रकोप जैसे तैला/थ्रिप (thrips), इल्लिया, पत्ते काटने वाली सुंडी (catterpillar), निमेटोड और सफेद लट (White grub)
- रोपाई की असम्बंधता
- सिचाई की गलतिया
- हवादार भंडारण के आभाव से होने वाली सडन
- उर्वरक और पि एच के असंतुलन से होने वाली, पोषण की कमी
- दुय्यम दर्जे के बीजों का उपयोग
- महंगे बिज, दवाए, औजार और उर्वरकों से लागत में हो रही बढवार
- व्यापारियों की मनमानी
- निर्यात धोरण में सरकारी मनमानी
- दरोमे होने वाले उतार चढ़ाव
प्याज के फसल में मुनाफा कमाने के मौके क्या है?
- प्याज की फसल साल में तिन बार लेने से इसके दरों में होने वाले उतार चढाव का लाभ मिलेगा. व्यापारी और सरकार के मनमानी का कोई सीधा तोड़ नही होता है.
- सिर्फ प्याज ना बेचे. इसके अन्य उत्पादन जैसे हरी पट्टी, बिज और बीजोत्पादन के लिए बल्ब इन सभी की विक्री करे.
- मिटटी की उर्वरता बढ़ाने के लिए इसमें ओर्गेनिक कार्बन का प्रतिशत ०.५ से अधिक होना चाहिए. इसके लिए पूर्णत: सड़ी हुई कम्पोस्ट के साथ ट्रायकोडर्मा, बव्हेरिया, मेटारायझियम जैसे जैविक फफुंद अवश्य मिलाए.
- शाखनाशी, फफूंदनाशी और किटनाशियों का चुनाव करते समय दो सक्रिय तत्व वाले आधुनिक दवाओं का चुनाव करे. इनकी पक्की रसीद ले. किट नियंत्रण हेतु स्टिकी ट्रैप, लाईट ट्रैप, फेरोमोंन ट्रैप का प्रयोजन अवश्य करे.
- उर्वरको में कम्पोष्ट, बेसल डोस और आवर्ती डोसेस का प्रयोग करे.
- रसायनिक उर्वरकों में एन पि के के अलावा केल्शियम, मैग्नेशियम, सल्फर, झिंक, लोह, मैगनीज, कोंपर, बोरान, मोलिब्डेनम, सिलिकोन उर्वरकों की संतुलित मात्रा का प्रयोग करे.
- बीजों की जाच करना आवश्यक है. पानी में तैरने वाले बीजों को निकाल दे. बिज संशोधन करने हेतु तिन सक्रिय तत्वों से बने यूपीएल के इलेक्ट्रोन का प्रयोग करे
- रोपाई करते समय प्रति एकड़ ३ लाख पौधों की रोपाई करे. इसके लिए प्रति वर्ग फुट पर ९ पौधों की रोपाई करनी होगी. हर पौधे ने १०० ग्राम की प्याज बनाई तो आपको ३,००,००० X १०० = ३००,००,००० ग्राम याने ३०० क्विंटल प्रति एकड़ का उत्पादन होगा.
- प्याज बनने से पहले कुछ हिस्सा हरीपत्ती बेचने से आपकी लागत का बड़ा हिस्सा वक्त से पहले निकाल लेना भी संभव है.
- प्याज भंडारण के लिए हवादार, सुखी और ठंडी गोदाम बनाए जिसमे प्याज की छटाई करना संभव हो. भंडारण करते समय प्याज पर कार्बेन्डॅझिम (५०%) और सल्फर (९० %) का उपयोग करे. (carbendazim 50 % and Sulphur 90 %)
- उपज का भंडारण करने से पहले छटाई अवश्य करे. बीजोत्पादन के लिए अच्छे दर्जे के, ५० से ६० ग्राम वजन के बल्ब अलग करे. इसको अन्य किसानों बेचकर फायदा होगा.
- खुद के लिए बीजोत्पादन करते समय कुछ हिस्सा एनी किसानों को बेचने से फायदा बढ़ सकता है.




