कम पानी-कम लागत में कमाए लहसुन-प्याज से लाखों का फायदा!
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किसान भाइयो, अलग अलग कंपनियों के चिंटू, जो खुद खेती-बाड़ी नही करते, आपसे खर्चा करवाते है. फसल की लागत दुगनी-तिगुनी करवाते है. लुढकते मार्केट रेट मुनाफा खा जाता है. फसल की लागत भी वसूल नहीं होती! कर्जे बढ़ते है और टेंशन भी! इस लेखमे खर्चे कम करने के नूस्के दे रहे है. उपज अवश्य बढ़ाए लेकिन बढ़ते मार्केट रेट का लाभ उठाने हेतु, योजना भी अवश्य बनाए.
किसान भाइयों, लहसुन-प्याज दोनों ही छोटे अवधि की फसले है और ढेर सारे किसान इनकी उपज लेते है. अगर मंडी में लहसुन-प्याज लगातार, भारी मात्रा मे पहुचने लगा, तो रेट मिलन संभव नहीं. फसल की लागत तो छोडिए, उपज को मंडी तक ढोने का खर्चा निकालना कठिन हो जाता है. यह बात ध्यान में रखते हुए सबसे महत्वपूर्ण सबक जान ले ....
किसान भाइयों, लहसुन-प्याज दोनों ही छोटे अवधि की फसले है और ढेर सारे किसान इनकी उपज लेते है. अगर मंडी में लहसुन-प्याज लगातार, भारी मात्रा मे पहुचने लगा, तो रेट मिलन संभव नहीं. फसल की लागत तो छोडिए, उपज को मंडी तक ढोने का खर्चा निकालना कठिन हो जाता है. यह बात ध्यान में रखते हुए सबसे महत्वपूर्ण सबक जान ले ....
- लागत कम से कम हो. जो भी हो ...खुद के पूंजी से करे, साहूकार से कर्जा ना उठाए
- अकेले फसल पर निर्भर ना रहे, अन्य फसले / आय के अन्य स्त्रोतोपर ध्यान दे
- लहसुन प्याज लगाना है, तो साल-भर लगातार उपज ले. ऐसा करने से मार्केट में मिलते रेट का एवरेजिंग होगा
- खुदके बिज बनाए और खुद इस्तेमाल करे..मार्केट में बिज महंगे होने के साथ साथ - पुराने, खराब हो सकते है.
- बीज संशोधन अवश्य करे.
- जरूरत से अधिक पौधे बनाए ताकि अन्य किसानों को पौधे बेचकर पैसा बनाया जा सके
- सब्जी मार्केट में हरी पत्ती बेचकर भी, वक्त से पहले लागत को निकाल सकते है. बची हुई फसल पर कोई भी समस्या हुई तो भी आपके लागत को कोई नुकसान नही होगा.
- रेट कम हो तो उपज को सीधे मंडी में ना बेचे, हवादार तरीके से जमा कर के किश्तों में बेचे. प्याज जमा करने के लिए सरकारी सब्सिडी मिलती है, अवश्य लाभ उठाए. जमा प्याज छटाई करके खराब प्याज निकाल दे. हवा में नमी की मात्रा अधिक हो तो कार्बेन्डाझिम लगाने से फफूंद को रोखा जा सकता है.
- अगर आप खुदका ऑर्गेनिक मेन्यूअर बनाते है तो अच्छा है मार्केट मे मिलने वाले मेन्यूअर कितने भी चमकीली पेकिंग मे मिले उतना अच्छा नहीं होता.
- प्रति एकड़ 10-20 टन ऑर्गेनिक मेन्यूअर के साथ फॉस्फेट घुलाने वाले जीवाणु खाद और ट्रायकोंडर्मा का प्रयोग करे.
- प्याज और लहसून जैसी फसलो को ऑरेगेनिक का मार्केट ना के बराबर है. रासायनिक खाद करे ताकी उपज बढे. केमिकल खाद मे निम्न दो कॉम्बो मे से किसी एक का प्रयोग करे
- युरिया 15 किलो, एसएस पी 45 किलो, एमओपी 17 किलो, जिंक सल्फेट १५ किलो, मेग्नेशियम सल्फेट ३० किलो, 30 दिन बाद युरिया 15 किलो, 45 दिन बाद युरिया 15 किलो + एमओ पी 35 किलो
- युरिया 11 किलो, डीएपी 68, एसओपी 21 किलो, जिंक सल्फेट १५ किलो, मेग्नेशियम सल्फेट ३० किलो, 30 दिन बाद युरिया 11 किलो, 45 दिन बाद युरिया 11 किलो, एस ओ पी 42 किलो
- प्रति एकड़ ३ लाख तक पौधे लगाने होंगे. इसलिए प्रत्येक चौ फुट मे ८ से ९ पौधे रोपण करे.
- अगर आप प्लास्टिक शीट बिछा रहे है तो ४ इंच के अंतर पर छेद वाला, ४ फिट x ४०० मीटर का २५ मायक्रोन शीट इस्तेमाल करे. ध्यान रहे इसके नीचे आपको लेटरल की दो कतारे बिछानी होगी. एमेजन पर आपको २० प्रतिशत तक छूट मिल सकती है. यहा क्लिक कर ऑफर देखे. इस विधि से आपका खरपतवार पर खर्चा कम होगा, पानी मे ३०-४० प्रतिशत बचत होगी. लेकिन शीट का खर्चा १८-२० हजार और टपक सिचाई सेट की कीमत लगेगी. शीट दोबारा इस्तेमाल होगी फिर भी इसमे २-३ हजार का नया शीट तो जोड़ना ही पड़ेगा.
- अगर आप रेन पाइप इस्तेमाल करेंगे तो प्लास्टिक शीट बिछा नहीं सकेंगे. रेन पाइप एमेजन से खरीदेंगे तो प्रति एकड़ का खर्च करीबन ३३००० होगा. कभी कभी ऑफर उपलब्ध होता है. ऑफर चेक करने हेतु यहा क्लिक करे.
- रेन पाइप का उपयोग दो फिट तक बढ़नेवाले फसलों मे इस्तेमाल कर सकते है जैसे लहसुन, प्याज, मूंगफली, उड़द, गाजर, गोभी, मिर्ची, पालक, मेथी, तोरई, शलगम, जीरा, मटर, मसूर, मूंग, धनिया, चुकंदर, बेंगन, खीरा, फूल, नर्सरी.
- प्रेशर अनुसार, पाइप के दोनों साइड मे ३ से ४.५ मीटर तक बौछार होती है. पानी मे ६०-७० % बचत होकर, ५०% अधिक लाभ मिलता है.
- इसको बड़े ही सामान्य तरिकेसे बिछाया और जमा किया जा सकता है. पूरा सेट एक जगह से दूसरे जगह ले जाना भी बेहद आसान है. इसलिए, उपयोग होने पर एक फसलसे निकालकर दूसरे फसल मे इस्तेमाल कर सकते है.
- क्षेत्र नुसार किट भी उपलब्ध है. किट मे मेन, सब लाइन के साथ कनेक्टर और एण्ड केप भी आते है.
- प्याज और लहसुन मे निम्न शाखनाशियोंका इस्तेमाल किया जा सकता है.
लगाने से पहले
- स्टॉम्प एक्स्ट्रा/डोमीट्रेल/दोस्त सुपर/पानीडा ग्रेंड (Pendimethalin 38.7 % CS) 3 मिली प्रति लीटर
लगाने के बाद
- टरगा सुपर, इमपुल, हकामा (Quizalofop ethyl 5% EC) २ मिली प्रति लीटर+ गोल/गेली गन (Oxyfluorfen 23.5% EC) १ मिली प्रति लीटर
- डेकेल (प्रोपाक्वीझाफ़ोप ५%+ओक्सीफ्लूऑरफेन १२ % इसी; (Propaquizafop 5% + Oxyflurofen 12% w/w EC) ३५० मिली प्रति एकड़
- प्याज और लहसून मे विविध फफूंद जनित रोग आते है. इनकी जानकारी यहा दे रहे है।
- विगलन: इसे बेसल रॉट (Basal Rot) भी कहा जाता है. पत्तिया और बिज डंठल पीले होते है और सुख जाते है. इस कारण से प्याज का कंद छोटा रहे जाता है. अगर आप बिज उत्पादित कर रहे है तो अम्बेल का आकार छोटा रहता है. कंद के निचले हिस्से में सडन देखि जा सकती है और जड़े भी गुलाबी रंग की दिखाई देती है. साफ़/कोम्बीसेफ/ इडीशन/ रिव्हाइव (Carbendazim 25% + Mancozeb 50% WS) १ ग्राम प्रति लिटर के औसत से छिड़के और ड्रेंचींग (रीसाव) करे.
- सफेद गलन (White rot): मिटटी के पास प्याज का उपरी हिस्सा गल जाता है और वहा सफेद एव भूरी फफूंद के दाने दिखने लगते है. पौधा मुरझाता है और सुख जाता है. कंद पूरी तरह फफूंद से ढक जाता है और पूरी तरह सड जाता है. बीजों की फसल में अम्बेल बनते ही नही हिया. मिटटी तैयार करते वक्त हल्की नमी बनाकर जुताई करने से रोगकारक फफूंद मारे जाते है. ट्रायकोडर्मा को मिलाने से फायदा होता हिया. पौधों को लगाते समय उनको १ ग्राम प्रति लिटर साफ़/कोम्बीसेफ/ इडीशन/ रिव्हाइव के घोल में भिगोकर लगाए. तथा इसी का ड्रेंचींग (रीसाव) करे.
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बैंगनी धब्बा (purple blotch): इस रोग की फफूंद मिट्टी तथा बिज के माध्यम से फैलता है. फसल के पत्तिया तथा डंठल पर सफेद भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते है जिनका मध्य भाग बेंगनी रंग का होता है. बरसात में यह रोग अधिक असर दिखता है. लक्षण दिखाई दे तो निम्न प्रयोग करे.
- स्कोअर (Difenoconazole 25% EC) १ मिली प्रति लिटर
- एमीस्टार (Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% w/w SC ) १ मिली प्रति लिटर
- कस्टोडीया (Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3% w/w SC) १ मिली प्रति लिटर
- विस्मा (Boscalid 25.2% +Pyraclostrobin 12.8% WG) १ मिली प्रति लिटर
- क्लच/केब्रीओ टॉप (Metiram 55% + Pyraclostrobin 5% WG) १ मिली प्रति लिटर
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झुलसा (Blight): प्याज में ३ से ४ प्रकार से झुलसा होता है. पत्तिया हरी दिखाई देती है लेकिन फफूंद पत्ती के भीतरी सतहमें फैलती है. कभी पत्तियाँ स्प्रिंग की तरह मुडती है तो कभी राख जैसे धब्बे आते है जो फैलकर पत्तिको झुलसा देते है.
- इंडोफिल झेड ७८ (Zineb 75% WP) २ ग्राम प्रति लिटर
- कस्टोडीया (Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3% w/w SC) १ मिली प्रति लिटर
- आसिता: प्याज में मृदुरोमिल असिता (Downey mildew) और चूर्णिल असिता (Powdery Mildew), दोनों रोग दिखाई देते है. हवा में नमी होने से पत्तियों पर छोटे सफेद रंग के धब्बे और हल्के भूरे रंग के कवक तंतु देखे जा सकते है. इसे मृदुरोमिल असिता कहा जाता है. पत्तियों पर सफेद रंग के फफूंद के बीजाणु , चूर्ण पाउडर की तरह दिखाई देते है जिसे चूर्णिल असिता कहा जाता है.
- मृदुरोमिल असिता के नियंत्रण हेतु
- रिडोमिल एम् झेड या मेटालिक मिक्स, इंडोफिल झेड ७८ या रिडोमिल गोल्ड २.५ ग्राम प्रति लिटर का घोल हर दस दिन के अंतराल से छिडकाव करे
- थायोन्यूट्रि ०.२ प्रतिशत से छिडकाव करे
- डीनोकैप १ मिली प्रति लिटर से छिडकाव करे
- प्याज की वृद्धि पर असामान्य ठंड, गर्मी, नमी और बारिश का बुरा असर होता है. इनसे उपज को बचाने हेतु किसान भाई चुनिंदा उर्वरक, फफूंदीनाशक, किटनाशकोंके साथ साथ लिहोसिन, चमत्कार और कल्टार जैसे असरदार वृधिनियंत्रकोंका छिडकाव कर सकते है.
- वर्ष २०२० में प्रकाशित संशोधन पत्रिका नुसार एन पि के सल्फर और बोरान के संतुलित मात्रा के साथ चमत्कार के ३-४ मिली प्रति लिटर के छिडकाव से फसल के वृधि और प्याज के साइज एवं रंग में सुधर पाया गया.
- उसी प्रकार पौधों के पुनररोपण के ६० से ७५ दिनों के बाद, लिहोसिनके ०.५ मिली प्रति लिटर के छिडकावसे प्याज की साइज एकसमान और बड़ी निकलती है.
- प्याज के बिज उत्पादित करते समय, फसल पर फुल लगने से पहले, कल्टार (३-४ मिली प्रति १५ लिटर) के छिडकाव से फसल पर एकसमान और बड़े बड़े फुल लगते है, उनमे गुणवत्तापूर्ण बीजोंकी संख्या में वृद्धि होती है.
किसान भाइयों इस लेख में आपको जो जानकारी दियी है उसका अवश्य उपयोग करे. लेख पसंद हो तो शेअर करे!







