प्याज का "जलेबी रोग," देगा नुकसान की कडवाहट!
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किसान भाइयो, रिसेट एग्री के माध्यम से प्याज उत्पादकों को हम एक सुझाव हरदम देते है. प्याज की उपज, एक साथ, २० प्रतिशत से अधिक भूमि पर ना ले. इसे हर मोसम में लगाए. प्याज के बिज और रोप स्वयम उत्पादित करे. बिज, रोप, हरी पत्ती, बल्ब और प्याज; इस हर उत्पादन की विक्री करे. प्याज स्टोअर करके धीरे धीरे बेचे. इस तरह आप, प्याज के रेट में होने वाले उतार चढाव से बचकर, अच्छा मुनाफा बना पाएँगे.
आज बात करेंगे प्याज में आनेवाले अनोखे रोग की.
प्याज में आनेवाला जलेबी रोग किसान की उम्मीदों पर पानी फेर सकता है. कोलेटोट्रायकम नामक फफूंद से होने वाले इस रोग में प्याज की पत्तियों का आकार जलेबी जैसा हो जाता है. इसके शुरुवाती लक्षणों में पत्तियों पर पानीदार पीले दाग पड़ते है जो पत्ती के लम्बाई में फैलते है. कुछ लोग इसे ट्वीश्टर या स्प्रिंग भी कहते है.
कोलेटोट्रायकम फफूंद के रेशेदार दाने मिटटी में सालोंतक और बीमार फसल के अवशेषों में महीनों तक बने रह सकते है.

जब मिटटी में सड़ने वाले जैव अवशेष अधिक होते है, तापमान २५ से ३० डिग्री होता है और मिटटी में नमी लगातार बनी रहती है, यह रोग पनपना शुरू करता है. अगर तापमान १५ डिग्री के निचे गया तो फफूंद खुद बखुद नियंत्रित हो जाती है.
फसल पर रोग आनेका इन्तेज़ार ना करे. रोग को उकसाने वाला वातावरण तैयार हो जाए तो, एतियात कृति करने से आप फसल की सेहत अच्छी रखते हुए अधिक उपज ले सकते है.
प्याज का यह रोग विनाशकारी होता है. पत्तियों को टेढ़ा-मेढा और पिला कर देता है. प्रकाश संश्लेषण बाधित होने से प्याज की साइज कम रहेती है. भंडारण के दौरान प्याज सड़ने की समस्या भी बढ जाती है.
रोगथाम के लिए
- प्याज लगाते समय जल निकासी की व्यवस्था अच्छेसे करे.
- मिटटी तैयार करते समस इसमें ट्रायकोडर्मा पावडर १ किलो प्रति एकड़ के हिसाब से मिलाए.
- बीजों को उपचारित करने हेतु युपिएल के इलेक्ट्रोन का १ से २ मिली प्रति किलो के औसत से प्रयोग करे
- रोपाई के समय पौधों को फिरसे उपचारित कर सकते है.
- फसल पर लक्षण दिखाई देनेपर, निम्न दवाओं में से, उपलब्ध दवा का छिडकाव करे
- एमीस्टार (Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% w/w SC ) १ मिली प्रति लिटर
- कस्टोडीया (Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3% w/w SC) १ मिली प्रति लिटर
- विस्मा (Boscalid 25.2% +Pyraclostrobin 12.8% WG) १ मिली प्रति लिटर
- क्लच/केब्रीओ टॉप (Metiram 55% + Pyraclostrobin 5% WG) १ मिली प्रति लिटर
प्रभावित फसल को उबारने का तरीका
अगर फसल में रोग बुरी तरह से फ़ैल चूका है तो आपको उपरोक्त फफूंदी नाशकों के अलावा प्रभावित फसल को अनावस्था से उबारना होगा. ध्यान रहे लागत कम रखने के लिए सस्ते और प्रभावी उपायों पर ध्यान दे. एन-पि-के और सल्फर उर्वरको के डोसेस ठीक करे. पत्तियों में सुधार के लिए आप नैनो यूरिया का छिड़काव कर सकते है. पत्तियों की अवस्था सुधारने के बाद प्याज के साइज में सुधार हेतु चमत्कार के ३-४ मिली प्रति लिटर का छिडकाव करे.
किसान भाइयो, इस लेख के माध्यम से आपको इस रोग के लक्षण, इलाज के अलावा रोग होने का अनुमान किस तरह लगाना है और आहत फसल को कैसे उबारना है, इसकी सटीक जानकारी दियी गयी है. आशा करते है के रिसेट एग्री का यह प्रयास आपको पसंद आया हो तो कमेन्ट करे, लेख को शेअर करे.
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