क्या आपके खेतों मे केचुओ के ना होने से कोई फर्क पड़ता है?
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एक मुट्ठी स्वस्थ मिट्टी में पृथ्वी पर मौजूद कुल इंसानों से भी ज्यादा सूक्ष्मजीव होते हैं, और इस पूरे सूक्ष्म-संसार का 'इंजन' केंचुआ है। केंचुआ कोई साधारण जीव नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक हलवाहा जो दिनरात खेत जोतता है, खाद कारखाना है निरंतर खाद बनाता है और मिट्टी का डॉक्टर है मिट्टी मे सुधार लाता है।
अगर आपके खेत से केंचुए गायब हो गए हैं, तो यह महज एक जीव का गायब होना नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि आपके खेत की मिट्टी 'कोमा' में जा रही है। आइए इस विषय को और गहराई से समझते हैं।
केंचुओं की तीन मुख्य श्रेणियां
यह जानना बहुत जरूरी है कि हर केंचुआ एक जैसा काम नहीं करता। प्रकृति ने इन्हें तीन स्तरों पर काम सौंपा है:
सतही केंचुए (Epigeic): ये मिट्टी के ठीक ऊपर रहते हैं। इनका काम गिरी हुई पत्तियों, पराली और गोबर को खाकर सड़ाना है। (वर्मीकम्पोस्ट बनाने में इन्हीं का इस्तेमाल होता है, जैसे आइसेनिया फेटिडा)।
मध्य परत के केंचुए (Endogeic): ये मिट्टी की ऊपरी कुछ इंच की सतह में आड़े-तिरछे चलते हैं। ये मिट्टी को खाते हैं और उसे भुरभुरा बनाते हैं।
गहरी सुरंग वाले केंचुए (Anecic): ये खेत में कई फीट गहरी सीधी सुरंगें बनाते हैं। ये गहराई से खनिज तत्वों (Minerals) को ऊपर लाते हैं और बारिश के पानी को जमीन के भीतर ग्राउंडवाटर (भूजल) तक पहुँचाने का काम करते हैं।
जब खेत से केंचुए खत्म होते हैं, तो ये तीनों तंत्र एक साथ काम करना बंद कर देते हैं।
केंचुओं के न होने से खेत पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभाव
1. खेत में 'हार्डपैन' (Hardpan) का बनना और जड़ों का दम घुटना
केंचुओं के बिना, भारी ट्रैक्टरों की जुताई और रासायनिक खादों के लगातार इस्तेमाल से मिट्टी की सतह के कुछ इंच नीचे एक बेहद कठोर परत (Hardpan) बन जाती है। इस कठोर परत को पौधों की जड़ें भेद नहीं पातीं। जड़ें उथली रह जाती हैं, जिससे तेज हवा चलने पर फसल जल्दी गिर जाती है (Lodging) और पौधे का विकास रुक जाता है।
2. पोषक तत्वों का मिट्टी में 'लॉक' हो जाना (Nutrient Locking)
अक्सर किसान शिकायत करते हैं कि खेत में डीएपी (DAP) और यूरिया डालने के बाद भी फसल को नहीं लग रहा है। इसका कारण केंचुओं की कमी है। केंचुओं की आंत (Gut) एक रासायनिक प्रयोगशाला है। जब मिट्टी केंचुए के पेट से होकर गुजरती है, तो उसमें मौजूद अघुलनशील पोषक तत्व (जो पौधे नहीं ले सकते) घुलनशील अवस्था में आ जाते हैं। केंचुओं के न होने से खाद मिट्टी में जमा होकर पत्थर बन जाती है।
3. सूखे और बाढ़ का दोहरा खतरा
केंचुओं की गहरी सुरंगें स्पंज की तरह काम करती हैं। अगर ये सुरंगें नहीं होंगी, तो बारिश का पानी गहराई में नहीं जाएगा। हल्की बारिश में पानी खेत में भर जाएगा (जलभराव), जिससे जड़ें गल जाएंगी और फंगस लगेगी। वहीं, धूप निकलने पर खेत तेजी से सूख जाएगा, जिससे आपको बार-बार सिंचाई करनी पड़ेगी।
4. मित्र सूक्ष्मजीवों (Microbes) की मृत्यु
केंचुए का मल (वर्मीकास्ट) बैक्टीरिया और फंगस जैसे मित्र सूक्ष्मजीवों का घर होता है। ये सूक्ष्मजीव ही पौधों को बीमारियों से बचाते हैं। केंचुए खत्म होने का सीधा मतलब है मित्र जीवों का खत्म होना और हानिकारक फंगस व दीमक का बढ़ना।
खेत से केंचुए क्यों रूठ गए?
जहरीले रसायनों का कॉकटेल: खरपतवारनाशक (Herbicides) और कीटनाशक केंचुओं की त्वचा को जला देते हैं (केंचुए त्वचा से सांस लेते हैं)।
अत्यधिक और गहरी जुताई: रोटावेटर और कल्टीवेटर से बार-बार गहरी जुताई करने से केंचुओं की बनाई गई सुरंगें टूट जाती हैं और वे कट कर मर जाते हैं।
मिट्टी का नंगा रहना और पराली जलाना: केंचुए अंधेरे और नमी में काम करते हैं। जब खेत नंगा रहता है (बिना किसी फसल या घास के) या उसमें पराली जलाई जाती है, तो सूरज की तेज गर्मी और आग से केंचुए गहराई में जाकर निष्क्रिय (सुषुप्त) हो जाते हैं या मर जाते हैं।
केवल यूरिया-डीएपी पर निर्भरता: गोबर की खाद डालना बंद करने से केंचुओं का भोजन छिन गया है।
खेतों में केंचुओं का 'पुनर्जन्म' कैसे कराएं? (वैज्ञानिक समाधान)
केंचुए आपके खेत में गहराई में अभी भी सुषुप्त (Dormant) अवस्था में मौजूद हो सकते हैं। उन्हें वापस सक्रिय करने के लिए ये कदम उठाएं:
जीवामृत / घन जीवामृत का प्रयोग: देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन से बना 'जीवामृत' खेत में डालें। इसकी गंध और इसमें मौजूद करोड़ों सूक्ष्मजीव गहराई में सोए हुए केंचुओं को वापस ऊपर आने के लिए मजबूर कर देते हैं।
मल्चिंग (आच्छादन) करें: मिट्टी को कभी नंगा न छोड़ें। फसल कटने के बाद उसके अवशेष (पराली/पत्तियां) खेत में ही बिछा दें। यह मल्चिंग केंचुओं के लिए एक ठंडी चादर और भोजन दोनों का काम करेगी।
न्यूनतम जुताई (Less Tillage): जुताई कम से कम करें। बिना जुताई के सीधे बीज बोने वाली मशीनों (जैसे हैप्पी सीडर या सुपर सीडर) का प्रयोग करें ताकि केंचुओं का घर न उजड़े।
हरी खाद (Green Manuring): साल में एक बार खेत में ढैंचा (Sesbania), लोबिया या सनई बोएं और फूल आने से पहले उसे मिट्टी में मिला दें। यह मिट्टी को नरम करेगा और केंचुओं की दावत का काम करेगा।
केंचुआ खाद (Vermicompost) का 'स्टार्टर' के रूप में इस्तेमाल: अच्छी क्वालिटी की वर्मीकम्पोस्ट खेत में डालें, जिसमें केंचुओं के अंडे (कोकून) मौजूद हों, ताकि खेत में नई आबादी पनप सके।
जिस खेत में केंचुए सक्रिय होते हैं, वहाँ सिंचाई की जरूरत 30-40% कम हो जाती है और रसायनिक खादों का खर्च 50% तक बच सकता है। केंचुओं की वापसी केवल मिट्टी बचाने का अभियान नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर किसान की जेब में पैसा बचाने का सबसे अचूक तरीका है।




