टमाटर के फसल को सफेद मक्खी से कैसे बचाए?

टमाटर के फसल को सफेद मक्खी से कैसे बचाए?

टमाटर एक उमदा फसल है. नयी किस्मे अच्छी उपज देती है. अनेक किसान इस फसल के माध्यम से भरपूर मुनाफा कमा रहे है. टमाटर का इस्तेमाल करीबन ८० प्रतिशत व्यंजनों में किया जाता है. हरे फलोंकी सब्जी बनाई जाती है. लाल फलों की चटनी बनती है. टमाटर का सॉस, खेचअप और सूप पावडर भी बनता है. 

टमाटर का उत्पादन खुले खेतोंमें और संरक्षित तरीके से होता है. अगर आपको इस फसल से नुकसान हुआ है; तो कमी इस फसल में नही, आपके तरिकों में हो सकती है. 

इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे ऐसे तरीके, जो टमाटर के फसल को सफेद मक्खी के प्रकोप से शतप्रतिशत बचाते है. 

सबसे पहले हमे सफेद मक्खी के बारे में जान लेना होगा. इसको समझ लेनेसे इससे निपटना आसान हो जाता है.

टमाटर में आनेवाली सफेद मक्खी. यह एक आम किट है. भिंडी, बैंगन, मिर्च, टमाटर, कपास, सरसों, अनार, तिल, सूरजमुखी, तंबाकू, उडद, खीरा वर्गीय फसलों पर तथा खरपतवारोंपर इसका निवास होता है. 

सफेद मक्खी का जीवनचक्र पाच हिस्सोंमें बटा हुआ है. पत्तियों के निचले हिस्से में अंडे दिए जाते है. यह पीले होते है जो ५ से ६ दिनोमे धुमैले हो जाते है. इससे जो चुझे निकते है, वह पारदर्शी होते है और सरकते सरकते वो अपने लिये एक जगह तलाशते है. एक जगह रुखकर वो पत्तीका ज्यूस पिना शुरू करते है और शल्क या स्केल बन जाते है. शक्ली ज्यूस का सेवन तेजी से करते है, उसके उपर एक परत बन जाती है जो उसका संरक्षण करती है. इस परत के अंदर ही वो शंखी/प्यूपा बनती है. चार दिनों में इनसे प्रौढ़ बनती है. प्रोढ़ अब उडकर नये जगह की तलाश करती है, साथी चुनकर मिलन करती है और अंडे देती है. यह जीवन प्रक्रिया करीबन ४० दिनमें पूरी हो जाती है.

सफेद मक्खी से जीवनचक्र से एक बात साफ़ है के इसके चुझे और स्केल फसल को  सबसे अधिक क्षति पहुचाते है. अगर एक मक्खी ने दिए हुए सारे अंडोसे चुझे निकलते है तो ४० दिनों में १०० मक्खिया तैयार हो जाएगी जो करीबन १०० x १०० = १०,००० अंडे देगी. तो ४५-५० दिनों में फसल का ज्यूस चूसने वाले चुझो की संख्या दसहजार गुना बदती है. इस औसत का विचार किया गया तो हर दिन किट का प्रकोप २०० गुना के रेट से बढ़ता है. चुझे भूके होते है और तेजी रसशोषण करते है. 

किसान अक्सर ये नही समझते के उड़नेवाली  सफेद मक्खी फसल पर उतना असर नही करती जितना असर उसके चुझे और शल्की करते है. अगर टमाटर के फसल को सफेद मक्खी के असर से बचाना है तो अंडे, चुझे और शल्की खत्म करने होगे.

इस तरह के शोषण से फसल क्षतिग्रस्त हो जाती है. प्रकाशसंश्लेषण नही हो पाता, जड़ो का विकास रुक जाता है. फुल फल आना बंद हो जाता है. नियंत्रण के आभाव में देखते देखते ही फसल खत्म हो जाती है. सफेद मक्खी के चुझो तथा शल्की को पत्तीयोंसे अलग करना ना मुमकिन है. नियंत्रण के लिए ऐसी दवा का इस्तेमाल करना होगा जो फसल के अंदर फ़ैल कर पुरे ज्यूस को जहरीला बनाए. सफेद मक्खी के चुझे अक्सर इस्तेमाल होने वाली दवाओं के प्रति प्रतिरोध निर्माण कर लेती है, हम कितनीभी दवा छिडके, कंट्रोल नही होती. 

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तो इसका मतलब है के हमे यह सुनिश्चित करना होगा के हमारे फसल में प्रौढ़ मक्खीया अंडे ही ना दे पाए. आपके फसल के आसपास जितनि अन्य फसले या खरपतवार हो, उन्हें सफेद मक्खी से मुक्त होना चाहिए. खरपतवार को निकाल देना ही बेहतर होगा. अगर खरपतवार बड़ी है तो उसे ब्रश कटर से निकाल दे और फिर कल्टीवेटर चला दे. दो-चार पत्तों वाली खरपतवार हो तो शाकनाशी का छिडकाव करे. उचित हो तो आप आसपास वाली बाधित फसलोंपर सीधे वोलीअम फ्लेक्सी जैसे घातक, दो सक्रिय घटकोंवाली और आंतरप्रवाही दवा का इस्तेमाल कर सकते है.  

फसल के पोषण के लिए आवश्यक नत्र युक्त उर्वरकोंकी मात्रा एकसाथ देने के बजाए, छोटे छोटे नियमित हिस्सों में दे. ऐसा करने से पौधेकी अतिरिक्त और अनावश्यक शाखीय विस्तार में रोख लगेगी. जब फसल में नायट्रोजन की मात्रा जरूरत से अधिक होती है तो सफेद मक्खी के चुझे और शल्की आसानी से रसचूसते है, उनका जीवनचक्र तेज घुमंता है. 

insects attracted to yellow sticky traps
features of sticky traps

पौधों के रोपण के तुरंत बाद आप क्षेत्र में स्टिकी ट्रैप लगवाए. प्रति एकड़ ३०-४० ट्रैप लगवाने से प्रौढ़ किड इसपर चिपक जाएगी और अंडे नही दे पाएगी. अगर ट्रैप पर किट जमा हो रहे है तो ट्रैप की संख्या बढाए और जैविक छिड़काव मे अझाडीरेकटींन (नीम का तेल विरहित अर्क) का इस्तेमाल करे। मान्यता प्राप्त अझाडीरेक्टीन,ऑनलाइन उपलब्ध है.  ध्यान रहे आप निम तेल का इस्तेमाल ना करे. निमतेल में नाम मात्र सक्रिय घटक होते है, उसका उतना लाभ नही होता.  


अझाडीरेक्टीन का प्राथमिक असर एंटी-फीडेंट के रूप में  होता है. यह फसल के ज्हैयूस को कडवा बना देता है जिससे चुझे और शल्की रसचुसना बंद करते है, भुकमरी से वो जीवनचक्र के अगले हिस्से में नही जा पाते. इसके असर से उड़ने वाली  वयस्क सफेद मक्खी नंपुसक बन जाती है. मिलन ना होने से नये अंडे नही बनते. 

आप इसके साथ या अलटफलट कर वोलीअम फ्लेक्सी का छिडकाव कर सकते है. यह एक आधुनिक मिश्र किटनाशक है जो तेजी से फसल के अंदर जाकर फ़ैल जाता है. इसमें दो सक्रिय घटक है. दोनों अलग अलग तरीकेसे किटोको मारने का काम करते है. क्लोरेंट्रानिलिप्रोल बिसामाइड है जो किटोके शरीर से केल्शियम को खत्म कर देता है. केल्शियम के कमी से चुझे और शल्कीकी मासपेशिया काम करना बंद कर देती है, वो आराम करने लगते है.आलसी होकर रसचुसना बंद कर देते है.  थियामेथोक्सम एक निओनिकोटिनोइड है. यह तंत्रिका कोशिकाओसे संदेश वहन का काम रोखता है जिससे चूजे और शल्की को लकवा हो जाता है. 


वोलीअम फ्लेक्सी से प्रभावित कीड़े जल्दी से खाना और हिलना बंद कर देते हैं, जबतक कि वे मर नहीं जाते. यह दवा लंबे समय तक फसल को सुरक्षा प्रदान करती है. वोलीअम फ्लेक्सी टमाटर में आनावाली पत्ती सुरंगक (टुटा एब्सोल्युटा) और फलछेदक (फ्रूट बोरर) का भी नियंत्रण करता है.  


इन दो दवाओं के अलावा सफेद मक्खी पर प्रभावी किटनाशकों के सूचि में बायर का मोवेंटो एनर्जी,  सुमिटोमो का सुमीप्रेम, युपिएल का लान्सरगोल्ड, एचपिएम् का टर्मिनेटर ५०५, आय आय एल का शार्क, घरडा का रंगीला और सिंजेंटा का अलीका का समावेश होता है. 

समझिए आपके फसल में सफेद मक्खी का प्रकोप हो चूका है और मार्केट में टमाटर के रेट आसमान छु रहे है. तो एसेमे आप फसल को क्या ट्रीटमेंट दे ताकि उपज हात में आए और मुनाफा भी हो?

फसल में कब क्या करे ये कोईभी एक्सपर्ट बता सकता है लेकिन फसल से मुनाफा कमाने के लिए किसान को खुदको ही एक एक्सपर्ट बनना होगा. फसल के बारे में जो भी निर्णय लेना होता है वह एक आर्थिक निर्णय है.  उपज को बेचकर अगर आपको मुनाफा नही होता तो बहोत सारा खर्चा करना या बिलकुल ही खर्चा ना करना, दोनों ही बाते बेकार की है.  इसीलिए फसल के बारे में हर निर्णय लेते वक्त आपको मार्किट रेट का संज्ञान लेना जरूरी है. ऐसा करने से आपके फसल से मुनाफा होने के चान्सेस ६० से ७० प्रतिशत से अधिक हो जाते है. 

अगर आपके फसल में बीमारिया लगी हुई है और मार्किट में उपज के रेट उछल रहे है तो आपको फसल से उपज के लिए थोडा अधिक प्रयत्न करनेभर से अधिक मुनाफा मिलेगा. हो सकता है यह मुनाफा एक नोर्मल फसल से पाए गये बम्पर उपजसे मिलनेवाले मुनाफेसे दुगना या तिगुना हो. मार्केट में टमाटर के रेट में होनेवाले उतार-चढाव से यह बात संभव है, ये आप जानते हो. ऐसे वक्त क्या करे?

ऐसे वक्त आपको निम्न बातोंका ध्यान देना होगा.

  • फसलमें लगे बिमारी के कारणों को दबाने की कोशिश करे
  • फसल को उर्वरकोंकी सही मात्रा देकर, फसल की सेहत सुधारने की कोशिश करे
  • फसल को प्लांट टोनिक के माध्यम से फुल और फल देने के लिए प्रवृत्त करे. 

टमाटर में लगे बीमारियों को कैसे दबाए?

फसल में अगर किटोका प्रभाव है तो वोलीअम फ्लेक्सी जैसी असरदार दवा का छिडकाव करे. इसके साथ आपको फफूंदनाशी टाटा रेलीस का अयान या ताकत जैसे फफूंदनाशक और प्लेनोंफिक्स जैसे प्लांट टॉनिक का इस्तेमाल करना होगा. 

 फसल को उर्वरकोंकी मात्रा देना जरूरी है. कोनसे उर्वरक दिए जाए यह आपको तय करना होगा कोंकी आपके मिटटी में कोनसे पोषण तत्व कितने उपलब्ध है यह आप जानते ही होगे. फिरभी ००-५२-३४ के छिडकाव से फसल को आवश्यक फोस्फरस और पोटाश मिलेगा. अगर टपक सिचाई या ड्रेंचिंग से प्रति एकड़ ५०० ग्राम थायोन्यूट्री दे जो मृदा में स्थित पोषक तत्व उठाना फसल के लिए आसन हो जाएगा. 

इस लेख को खत्म करनेसे पहले हमे कुछ बाते अधोरेखित करनी चाहिए. फसल में सफेद मक्खी ना आए इसकी पूरी कोशिश करे. अगर आ जाए तो इसके प्रकोप को रोखने के लिए चुझे और शल्की को रोखने वाली दवाओ का इस्तेमाल करे. अगर फसल प्रकोप से ध्वस्त हो चुकी है तो फसल का क्या करना है, यह बात एक आर्थिक निर्णय है.

आपको यह जानकारी कैसे लगी यह बात कमेन्ट में अवश्य लिखे.  आपके खेतोंमें खड़ी फसल से आपको अच्छा मुनाफा मिले, इसी शुभकामना करता हु, धन्यवाद!

 

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