Whether the vegetables are local or foreign, success is not achieved.. one has to Mak it possible

तरकारी देसी हो या विदेसी, यूँ ही सफलता नहीं मिलती... खींच कर लानी पड़ती है।

लॉटरी का टिकट निकालकर कोई अमीर नहीं होता, वैसे ही सिर्फ जुकीनी जैसी विदेशी सब्जी उगाकर वन-टू-का-फोर नहीं होता! जुकीनी की खेती करते हुए, वन टू का फोर कैसे करें, यह जानिए, सिर्फ दो मिनट में।

झुकेगा नहीं.. कहने वाला पुष्पा हो या वन टू का फोर करने वाला लखन! मुझे तो हर युवा किसान में एक हीरो दिखता है! मौसम के बदलावों का सामना करते हुए, बाजार के उतार-चढ़ाव को समझते हुए, व्यवसायिक कौशल का इस्तेमाल करते हुए जब कोई सामान्य किसान, हर मौसम में, मुनाफा कमाने की कला सीख लेता है तो वह एक हीरो ही होता है! खेत खलिहान में सिर्फ उसकी ही फिल्म हिट होती है!!

झुकीनिकी फसल (zucchini cultivation) मुनाफा देगी क्या?

झुकीनी एक विदेशी सब्जी है जिसकी विशेषता यह है कि इसके बीज थोड़े महंगे होते हैं, लेकिन इसकी खेती का खर्च कम होता है। खुले खेत में, भरपूर रोशनी में, क्यारियां बनाकर सीधी बुवाई की जाती है। शुरुआती वृद्धि के लिए, बाद में फूल आने के लिए, फल लगने के लिए और फल के विकास के लिए उर्वरकों की योजना बनानी होती है। यह प्रबंधन खीरे जैसी फसलों के समान ही किया जा सकता है, बस इस बात का ध्यान रखें कि झुकीनी की वृद्धि दर बहुत तेज होती है और अवधि कम होती है। शुरुआत में पत्ती सुरंगक, फूल आने पर फल मक्खी और अंत में पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोग और कीट प्रबंधन होते हैं। पच्चीस दिनों में तुड़ाई शुरू हो जाती है, रोजाना तोड़ाई होती है, साठ से पचहत्तर दिनों में खेत खाली हो जाता है। यदि कटाई के लिए घर के लोग हों तो वे एक जैसा दिखने वाला ए ग्रेड का माल अधिक निकालते हैं। जब दरें बढ़ती हैं तो थोड़ा टेढ़ा-मेढ़ा, बी ग्रेड का माल भी अच्छा भाव देता है।

जब फल 6 से 8 इंच का हो और उसमें बीज न बना हो, तो तोरी तोड़ने का सही समय होता है।

झुकीनिके लिए मार्केट (zucchini market) कहा खोजेंगे?

झुकिनी दिखने में ककड़ी और स्वाद में कद्दू! हल्के हरे, हरे और पीले ऐसे तीन प्रकार हैं। पीले को ज्यादा भाव मिलता है। खाना बनाते समय इससे टिक्का, फ्राय, सलाद, नुडल्स ऐसे दिखने में आकर्षक और स्वादिष्ट पदार्थ बनाते हैं। अपने यहाँ के जैसे रस्सा भाजी या भरता नहीं बनाते इसलिए इसको रोटी के साथ खाने में ज्यादा विश्वास नहीं रखने वाले मेट्रो सिटी के भारतीय हाई क्लास सोसायटी के साथ थ्री, फोर और फाइव स्टार होटल में मांग होती है। कोविड के बाद भारत में पर्यटन और होटल इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। इंडियन होटल्स, आईटीसी होटल्स, ईआईएच, चालेट, लेमन ट्री, सायाजी, ताज जीव्हीके ऐसे बड़े होटल श्रृंखला में सब्जियों का सप्लाई करने वाले व्यापारियों को इस सब्जी के सप्लाई करने वालों की जरूरत होती है। नियमित और अच्छी क्वालिटी का सप्लाई लगता है। पर्यटन बढ़ने के समय में यानी दिवाली से मकर संक्रांति तक, अन्य समय की अपेक्षा मांग बढ़ती है। ठोस दर प्रति किलो 25 से 225 के बीच में होता

झुकीनिकी अंबेसेटर , ब्लेक ब्युटी, कॉस्टटा रोमेनस्को, दुजा, ऐटबॉल, फ्रेंच व्हाईट, गोल्ड रश, ग्रीन मशीन, सेनेक, स्पाईनलेस ब्युटी, स्पाईनलेस परफेक्शन अश्या व्हारायटी उपलब्ध हैं।

एक तो यह नियमित सब्जी नहीं है और मांग भी विशिष्ट होने के कारण, नए और उत्साही किसानों को देखकर कुछ व्यापारी ठग सकते हैं। रोजाना भुगतान का नियम लागू करके, पांच-छह व्यापारियों को साथ में रखें तो ज्यादा ठगी नहीं होगी। मांग के अनुसार 10 से 40 किलो के कोरूगेटेड बॉक्स में पैकिंग करके डेली ट्रैवल से माल शहर में भेजा जा सकता है। किलो के हिसाब से 5 से 6 रुपए परिवहन खर्च का हिसाब रखें

क्या जुकीनी फुटपाथ पर बेची जा सकती है?

जब मांग कम हो जाती है और कीमतें गिर जाती हैं, तो स्थानीय बाजारों और फुटपाथों पर बैनर लगाकर, रेसिपी की ज़ेरॉक्स प्रतियां बांटकर, जुकीनी बेचने वाले युवा कभी-कभी दिखाई देते हैं। यह माल भी आसानी से बिक जाता है क्योंकि यूट्यूब पर रेसिपी देखकर प्रयोग करने वाली मध्यमवर्गीय शौकीन गृहिणियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। फुटपाथ पर यातायात के अनुसार, वे 50 से 100 किलो माल आसानी से बेच सकते हैं, और उन्हें 50 से 100 रुपये तक की कीमत मिल सकती है। इस तरह से जुकीनी बेचते समय, कीमत खीरे की तुलना में 10-20 रुपये अधिक रखनी चाहिए।

 

भारत में सब्जियाँ

 

 

क्या "फार्म टू फोर्क" की अवधारणा झुकीनी की बिक्री के लिए सफल हो सकती है?

शहर में खाऊगल्ली, चौपाटी जैसी जगहों पर स्ट्रीट फूड के नाम पर कई अजीबोगरीब व्यंजन मिलते हैं। झुकीनी जैसी विदेशी सब्जियों से बने व्यंजन भी अपना ग्राहक वर्ग बना सकते हैं। अगर सब ठीक रहा तो फ्रेंचाइजी के माध्यम से "सुपर से उपर" व्यवसाय किया जा सकता है। जब चूल्हे पर बनी चाय, गुड़ की चाय चल सकती है, तो "विदेश की झुकीनी" जैसी स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट व्यंजन क्यों नहीं चल सकते? बेशक, यह एक प्रयोगशील, हुनरमंद, लोगों को जोड़ने वाले और नेतृत्व क्षमता वाले व्यक्ति का काम है। अगर कोई "मैं भला, मेरा खेत भला" जैसी सोच रखता है, तो जाने दीजिए।

जब चूल्हे पर बनी चाय, गुड़ की चाय चल सकती है, तो "विदेश की ज़ुकिनी" जैसी स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट अवधारणा क्यों नहीं चल सकती?

ज़ुकिनी की खेती कर रहे हैं! क्या सावधानियां बरतेंगे?

मित्रों, अगर झुकीनी का भाव 20 रुपये प्रति किलो मिलता है तो पचहत्तर दिनों में आपकी लागत  डबल हो जाती है और अगर दो सौ का भाव मिलता है तो आप मालामाल हो जाएंगे, मानो लॉटरी लग गई! यह कितना भी आकर्षक लगे, "आज कुछ तूफानी करते हैं!" ऐसा सोचकर, एकदम बड़े क्षेत्र में झुकीनी की खेती न करें। शुरुआत में चार-पांच बीज बोकर फसल का अध्ययन करें। इसकी खेती साल भर की जा सकती है। नियमित सप्लाई करने वाला किसान व्यापारी को चाहिए होता है इसलिए चरणों में बुवाई करें। एकही क्षेत्र में बार-बार खेती न करें, इससे रोग और कीट प्रबंधन का खर्च बढ़ सकता है। विदेशी सब्जियों में 30 से 40 सब्जियां शामिल हैं। धीरे-धीरे सभी प्रकार की खेती करके देखें। कुछ सब्जियों के लिए हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की आवश्यकता होती है जिसमें पूंजीगत खर्च अधिक होता है, लेकिन ऐसा प्रयास किया जा सकता है। शुरुआत में झुकीनी आसान और सरल है, अर्थात जो लोभ पर नियंत्रण और सटीक प्रबंधन का मंत्र जपेगा वह दुनिया को झुका पाएगा!

मित्रो, रीसेटएग्री डॉट इन वेबसाइट के माध्यम से हम आपसे नियमित रूप से संवाद कर रहे हैं। हम आपको हर विदेशी सब्जी की जानकारी देंगे, इसलिए पढ़ते रहिए!

जुकीनी जैसे विदेशी तरकारीयों  पर हमारे अन्य लेख पढ़ना न भूलें!

दो मिनट में पढ़कर होने वाले  हमारे लेख आपको एक बेहतर किसान बनने में मदद करेंगे। कुछ लेख आपको जागरूक करेंगे, आपका मनोबल बढ़ाएंगे, उपयोगी जानकारी देंगे, प्रश्न पूछेंगे या उनका समाधान करेंगे। आपको बस अपने दिन के दो मिनट हमारे लेख नियमित रूप से पढ़ने हैं। हम कोई शुल्क नहीं मांगते हैं। हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें या व्हाट्सएप चैनल से जुड़ें। नोटिफिकेशन चालू रखें और तैयार हो जाएं.. रोज़ थोड़ा पढे.. रोज़ थोड़ा बदलाव करे!

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