व्हायरस
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जबसे करोना ने दुनिया को सबक सिखाया है, हर किसी को व्हायरस या विषाणु के धोके का अनुभव हो चुका है. पौधों मे आनेवाले व्हायरस भी कोई कम नहीं होते. पौधों के बाहर इनका कोई अस्तित्व ही नहीं होता, लेकिन एक बार इन्हे पौधे के कोशिका मे प्रवेश मिल गया, फिर रोग के फैलाव मे और फसल को कमजोर करने मे; इनकी कोई बराबरी नहीं कर सकता!
व्हायरस के खुदकी कोई यंत्रणा नहीं होती. अपने मेजबान के बाहर, यह डिब्बी के तरह बने आवरण बंद गुणसूत्रों का एक छोटा सा सेट होता है. जब यह किसी अनुकूल मेजबान कोशिका के संपर्क मे आता है, यह अपने गुणसूत्र कोशिकाओ के अंदर भेजता है. यह गुणसूत्र कोशिका की सारी यंत्रणा पर कब्जा करते हुए, व्हायरस की कॉपिया बनाना शुरू करता है. आस पास के कोशिकाओ पर इसी तरह हमला करते हुए, पूरे पौधे मे फैलता है और पौधे की गतिविधियों को बंद करता है. क्यों की इसकी खुदकी कोई यंत्रणा ही नहीं होती, इसपर सीधा असर करने वाली दवाए हो ही नहीं सकती!
व्हायरस के प्रकोप के दो महत्व पूर्ण पहेलू है, जो आप जान ले, तो इसे अपने फसल की दावत उड़ाने से रोख सकते हो. कुछ कुछ रोग विषाणु सेल्फ लिमिटिंग होते है. सर्दी की व्हायरस की तरह, फैलने की कोशिश करते है लेकिन पौधे इनके प्रति प्रतिरोध निर्माण करते हुए, इन्हे नए कोशिकाऔ मे फैलने को रोखते है. धीरे धीरे फसल खुदकों इसके असर से उबार लेती है और स्वस्थ हो जाती है.
लेकिन कभी कभी पौधे इस तरहका प्रतिरोध निर्माण करने मे असफल होते है. व्हायरस पौधे की विकास को रोख देता है और पौधा मर जाता है.
एक पौधे से दूसरे पौधे मे फैलने के लिए, व्हायरस को वाहक की जरूरत होती है. रसचूसने वाले कीड़े ही अक्सर यह काम करते है. जब यह किसी एक पौधे से रस चूसकर दूसरे पौधे पर उड़कर जाते है, अपने साथ व्हायरस को ले जाते है. अगर किसी अच्छे किटनाशक के छिड़काव से इस वाहक को मार दिया गया तो व्हायरस का फैलाव रुख जाता है. ऐसा छिड़काव करने के साथ साथ, जिन पौधों पर प्रकोप हो चुका है उन्हे खेतों से निकालकर जला देना भी जरूरी है.
फिरभी यह प्रश्न तो आपके मन मे उठा ही होगा. ये व्हायरस आते कहा से है?
इनका मुख्य श्रोत बीजे होती है. जब हम बीमार पौधे से बीज निकालते है तब, अन्य बीजों के साथ मिलकर यह व्हायरस हमारे पौधों मे हाजिरी लगाते है. अगर इसे वाहक के मदत से फैलने का मौका मिल गया, तो फिर ये जमके दावत उड़ाता है. इसीलिए पौधशाला बनाते हुए व्हायरस का फैलाव रोखने के लिए सर्वतोपरी प्रयत्न करना जरूरी है. बीजों के चुनाव से लेकर पौधों का निरीक्षण करते हुए, उनसे बीमार पौधों को नष्ट करना, चूसक कीटों के फैलाव को रोखना और पौधों की प्रतिरोध क्षमता के विकास हेतु उनको संतुलित उर्वरक देना शामिल है. कीटों के रोकथाम हेतु दवा के छिड़काव के अलावा, नेट, लाइट ट्रैप, स्टिकी ट्रैप का प्रयोग अवश्य करे. आपको बाजार मे व्हायरस के लिए जो भी दवाए मिलती है, वह अक्सर पौधे के प्रतिरक्षा प्रणाली को जागृत करने वाली होती है, इनका असर व्हायरस पर नहीं होता. इसीलिए, इन दवाओं का प्रयोग बीमारी फैलने के पहेली ही करे और अन्य सारी सावधानीया अवश्य अपनाए.
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