खरपतवार
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खरपतवार वह अवांछनीय पौधे हैं जो फसलों के साथ उगते हुए पानी, पोषण, जगह और रोशनी के लिए उनसे प्रतिस्पर्धा करते है.

खरपतवार विपरीत परिस्थितियों में टिके रहने में माहिर होती है. फसलों के मुकाबले जल्दी जल्दी बिज निकालते है. इनकी बीजे एक साथ अंकुरित नहीं होती. एक ही पौधे से प्राप्त कुछ बीजे जल्दी अंकुरित होती है, तो कुछ लंबे अंतराल के बाद! मिट्टी मे सडन-गलन का काम करनेवाले सूक्ष्मजिव भी इन बीजोंको खत्म करने मे सक्षम नहीं होते. येआसानी से सड़ते नहीं है. खरपत वारो के तिन मुख्य प्रकार है.
- घास वर्ग के खरपतवारों की पत्तियां सकरी और लंबी होती हैं. सांवां, कोदों, मकड़ा, दूब, वनचरी, गिनिया घास यह कुछ उदाहरण है.
- चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार, दो बीज पत्रीय पौधे होते हैं. कनकवा, कोन्दरा, भांगद, चौलाई यह कुछ उदाहरण है.
- नरकट की पत्तियां लम्बी तथा तना ठोस होता है, जड़ों में गांठें होती हैं. मौथा एक प्रतिनिधिक उदाहरण है.
खरपतवार फसलों से प्रतिस्पर्धा करना यह एक मात्र समस्या नही है. ये किट, रोग, विषाणुओ जैसे अन्य घुसपेठीयोंको भी सहारा देती है! इसलिए फसल का चुनाव करते ही सबसे पहले हमें खरपतवार की खबर लेनी चाहिए!

सांवा, मकरा, खारयु, चीनयारी, चौलाई, बोखना, दुधि, कुंजरू जैसी खरपतवारे एक बार फसल में जम गई तो फिर फसल ही दिखाई तक नही देती. फसलों के उपज में ३५ से ९० प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है. यह खरपतवारे एक दिन मे नहीं निकलेगी. सालों से हमलोग लगे हुए है, खरपतवारोने अपना जम बनाए रखा है. इन्हे निकाल बाहर कर देना या नष्ट कर देना संभव नहीं है. लेकिन, यह फसल पे हामी ना हो पाए, यह देखना हमारा काम है. फसल के वृद्धि दर अनुसार शुरुवाती ४५ से ९० दिनों तक अगर खरपतवार को बढने से रोखा गया तो बादमे यह फलसो में जम नहीं पाती.

निराई से लेकर, खरपतवार को आग से जलाना, जहरीले शाखनाशी का छिडकाव करना, महंगे और मिटटी को प्रदूषित करने वाले प्लास्टिक शिट को बिछाना ऐसे अनेक उपाय बताए जाते है.
एक और जहा हम समझते है के खरपतवार फसल में बिनबुलाई मेहमान है; ऐसे भी महानुभाव है जो खरपतवारों को बचाने की बात करते है!

क्या करे, किसकी सुने?
सबसे पहले हमे खरपतवारों को समझना होगा और फिर फसल का चुनाव, फसल पद्धति के चुनाव के हिसाब से वक्त, मेहनत और लागत का खयाल रखते हुए खरपतवार प्रबंधन के पद्धतियों को चुनना होगा. खरपतवार प्रबंधन एक ऐसी कसरत है जिसमे हमे तकनीक और हिसाब का ख्याल रखने में निपुणता दिखानी होगी. मुनाफा हासील करना है तो उचित तकनीक इस्तेमाल करे और अपने जेब कि अवश्य सुने!
रिसेट एग्री के "खरपतवार प्रबंधन", ब्लॉग में विविध लेखों के माध्यम से विस्तृत चर्चा कियी जा रही है. आप उसे अवश्य पढ़े.
यह लेख "रिसेट एग्री" इस वेबसाइटपर लिखे जा रहे "दावत ए फसल" इस विशेष ब्लॉग का हिस्सा है. इस ब्लॉग के अन्य लेख पढने हेतु यहा क्लिक करे.
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