सिकेटर अपनाओ: कपास का मुनाफा बढ़ाओ!
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भारतीय किसानो को कॉटन की खेती में प्रोफिट कमाने के लिए बहुत स्ट्रगल करना पड़ता है। भारत कॉटन एक्सपोर्ट में टॉप पर है, लेकिन एक किसान के लिए यह फसल एक परेशानी है। फसल की लागत बढ़ रही है और पिछले कुछ सालों से उपज भी कम हो रही है। इसके बहुत से कारण हैं। रीसेटएग्री डॉट इन के माध्यम से हम किसान के हर समस्या का समाधान खोज रहे है।
इस लेख में हम कॉटन की उपज बढ़ाने के लिए सिकेटर के इस्तेमाल पर बात करेंगे। ये एक सस्ती तकनीक है जो कॉटन की खेती करने वाला हर किसान – चाहे उसकी ज़मीन छोटी ही क्यों ना हो – इस्तेमाल कर सकता है।
अनुभवी किसानों ने नोटिस किया होगा कि कॉटन के पौधे लंबे चौड़े और बुशी हो जाते हैं। नीचे की शाखाए को कम प्रकाश मिलता है। इसका मतलब है कि उस पर कम फूल और बॉल खिलेंगे। वह छोटे होंगे और देर से खुलेंगे। इन शाखाओं पर घने पत्ते होने से नमी बढ़ जाती है और हवा की हलचल भी कम हो जाती है, जो फंगल / फफूंद जनित रोगों को बढ़ावा देती है साथ ही, ये नीचेकी शाखाए ऊपर की शाखाओं के साथ पानी और न्यूट्रीएंट्स के लिए कंपिट करती हैं, जिससे, ऊपर की शाखाओ पर आने वाले फलों को जल और पोषण की कमी का सामना करना पड़ता है।
यहां है एक सिंपल सोल्यूशन दे रहे है जो आपके कॉटन प्रोफिट्स को बूस्ट कर सकता है। सिकेटर का उपयोग! सिकेटर एक हाथ में पकड़े जाने वाला टूल है जिसमें शार्प ब्लेड्स होते हैं। इसके मदत से आप पौधों के शाखाओं को क्लीन कट दे सकते हैं। ये आपके कपास के पौधों के उन नीचे वाली शाखाओं को काटने के लिए परफेक्ट हैं। सिकेटर से निचली शाखाए हटाने से आपके पौधे पर ज्यादा फूल और बॉल आएंगे और और ज़्यादा उपज हासील होगी। पौधे हवादार बनने से नमी कम हो जाती है और फफूंद जनित रोगों के पनपने मे कमी आती है। यह निचली शाखाए ना होने से ऊपर की शाखाओं को अधिक पोषण मिलता है जिससे उनपर ज्यादा फूल और फल लगते है।
सवाल ये उठता है कि कपास के पौधों की प्रूनिंग कब और कैसे करें? इन नीचे वाली शाखाओं की प्रूनिंग का बेस्ट टाइम बढ़वार वाली स्टेज के टाइम होता है, औसतंन बुवाई के 40-45 दिन के बाद। इससे पौधे अपनी सारी ताकत फूल और बॉल पर फोकस कर सकता है। सिकेटर का इस्तेमाल करके 45-डिग्री एंगल पर एक नोड (वो बंप जहां लीफ या ब्रांच स्टेम से जुड़ती है) के ऊपर क्लीन कट लगाएं। इससे बना हुआ घाव बिना किसी फफूंद लगे भर जाता है।
शाखा को एग्ज़ैक्ट किस हाइट पर हटाना है, ये आपके कॉटन वैराइटी और आपने उनको कितनी डेंसिटी में लगाया है उसपर डिपेंड करेगा। जनरली, प्लांट की एक्सपेक्टेड फाइनल हाइट के हाफवे मार्क तक की ब्रांचेस को हटाने का टारगेट रखें। हालांकि, नीचे की ब्रांचेस को हटाना बेनिफिशियल है, लेकिन बहुत ज़्यादा भी मत हटा दीजिएगा। आपको एयरफ्लो और एक मज़बूत प्लांट स्ट्रक्चर के बीच बैलेंस रखना है। हमेशा अपने सिकेटर को प्लांट्स के बीच में यूज़ करने से पहले और बाद में डिसइंफेक्ट करें, ताकि डिसीज़ेस ना फैले। इसके लिए आप रबिंग अल्कोहॉल का उपयोग कर सकते है। आप इस हमारे शिपिंग पार्टनर एमेझोंन से मँगवा सकते है।
रीसेटएग्री.इन को उम्मीद है कि सिकेटर के इस्तेमाल को अपने कॉटन फार्मिंग रूटीन में शामिल कर के, आप अपना मुनाफा 20 से 50 प्रतिशत अवश्य बढ़ा पाएंगे। खुशखबरी ये है कि हमारा शिपिंग पार्टनर एग्रीकल्चर टूल्स पर अच्छे डिस्काउंट्स और ऑफर्स दे रहा है। यह टूल्स इंडिया के हर कोने में शिप किए जा रहे हैं। यहां क्लिक करें और हमारे साथ शॉपिंग करते रहें।
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